हिमाचल की बेटी दीक्षा बनी इसरो में साइंटिस्ट रोजाना 12 घंटे की पढ़ाई, करती थी

हिमाचल की बेटी दीक्षा बनी इसरो में साइंटिस्ट रोजाना 12 घंटे की पढ़ाई, करती थी

क्षेत्र के ज्वाल गांव की दीक्षा का चयन इसरो के लिए हुआ है। वह इसरो में बतौर साइंटिस्ट इंजीनियर की पोस्ट पर काम करेंगी। उनकी माता वीना और पिता अनूप कुमार बेटी की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। दीक्षा ने एनआईटी जालंधर से बीटेक इलेक्ट्रिकल की थी। जज्बा कुछ खास कर दिखाने का था तो पढ़ाई के बाद एक साल नौकरी नहीं की और इसरो की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में डटी रहीं।

प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक दीक्षा पढ़ाई करती थीं।  दीक्षा ने बताया कि बीटेक के बाद उन्होंने कुछ समय तक टेस्ट की तैयारी की और कामयाबी हासिल की। उन्होंने बताया कि एक साल तक नौकरी भी नहीं की, क्योंकि वह अपना ध्यान पूरी तरह लक्ष्य की ओर केंद्रित कर रही थीं। दीक्षा ने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता, भाई और अध्यापकों को दिया है। दीक्षा के पिता जालंधर में ही किताबों के प्रकाशन का काम करते हैं व माता गृहिणी हैं। दीक्षा के इसरो में साइंटिस्ट इंजीनियर के पद पर चयन हो जाने पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है।खासकर युवाओं में चंद्रयान-2 मिशन के बाद इसरो के लिए अलग ही छवि है। स्थानीय विधायक बलबीर चौधरी ने इसरो में दीक्षा के चयन पर बधाई दी है। इसके अलावा स्थानीय निवासी यशपाल पाली, जीवन कालिया, जोगिंद्र, रोशन लाल, नायब तहसीलदार भरवाईं हरि सिंह, राज कुमार दीपांश कालिया सहित बड़ी संख्या में लोगों ने दीक्षा को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।

2267total visits,1visits today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *