By | February 20, 2020

पहले ही साल 92 करोड़ 30 लाख की वंदे भारत एक्सप्रेस ने रेलवे को कमाई कराई

इसमें कोई संदेह नहीं है किवंदे भारत एक्सप्रेस यह एक अनोखी ट्रेन है जो भारतीय रेलवे के लिए यात्रा तकनीक में एक नए युग को चिह्नित करेगी.आपको बता दें  कि यह एक सेमी-हाई स्पीड ट्रेन है जो फरवरी 2019 के मध्य से दिल्ली से वाराणसी के बीच परिचालन में आई है. यात्रा की अपेक्षित अवधि लगभग 8 घंटे है. यात्रा के दौरान इसका केवल दो ही स्टॉपेज है एक कानपुर और दूसरा प्रयागराज. इस सेमी-हाई स्पीड ट्रेन की लागत लगभग रु 100 करोड़ आई है और शताब्दी  एक्सप्रेस की तुलना में इसकी स्पीड तेज है. पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को  पिछले साल 15 फरवरी  को प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी ने हरी  झंडी  दिखाकर रवाना किया था।वाणिज्यिक सेवा 17 फरवरी, 2019 में शुरू की गई।वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों ने जहां आधुनिक सुविधाओं का लाभ लिया, वहीं रेलवे ने 92 करोड़ 30 लाख रुपये की कमाई कर ली है। ट्रेन के सफल संचालन के लिए उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) और उत्तर रेलवे (एनआर) के महाप्रबंधक (जीएम) ने रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। साथ ही पहली वर्षगांठ होने पर इलाहाबाद जंक्शन पर प्लेटफार्म नंबर-6 पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों का स्वागत भी किया गया। भारत की पहली स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस ने अपनी किसी भी यात्रा फेरे को रद्द किए बगैर एक वर्ष पूरा किया है। उत्तर रेलवे का दिल्ली मंडल, इस ट्रेन के  रखरखाव की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभा रहा है। वंदे भारत में रैक का निर्माण, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई द्वारा अक्टूबर 2018 में किया गया था।

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उल्लेखनीय है कि वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज ट्रेन है जिसे पूरी तरह से देश में ही विकसित किया गया है। दिल्ली-वाराणसी के बीच ट्रेन का दो स्टॉप कानपुर और प्रयागराज है। इसमें आटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे एवं सीढ़ियां, डिफ्यूज्ड लाइटिंग एवं रीडिंग लाइट, जीपीएस यात्री सूचना प्रणाली, स्मोक एवं फायर सुरक्षा प्रणाली, ड्राइवर से टॉक बैक की सुविधा, सीसीटीवी कैमरा मौजूद है। इसकी डिजाइन एक बुलेट ट्रेन की तरह है। राहुल गाँधी ने भी इस ट्रेन को लेकर ‘मेक इन इंडिया’ का मजाक बनाया था। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा था कि भारतीय इंजीनियरों की मेहनत का मखौल न उड़ाएँ। पीएम मोदी ने भी भारतीय इंजीनियरों की मेहनत को सलाम करते हुए विपक्षी नेताओं को सलाह दी थी कि वे स्वदेशी सेमी-स्पीड ट्रेन का सम्मान करें।

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