By | September 24, 2020

5G क्या है? 5 प्वाइंट में समझिए पूरी तकनीक, फायदे और चुनौतियां…

नई दिल्ली पिछले कुछ वर्षों में डाटा टेक्नोलॉजी में काफी परिवर्तन देखने को मिला है। 2जी से 3जी, 3जी से 4जी और अब 4जी से यह तकनीक 5जी में कदम रखने जा रही है। हालांकि, इसे अभी मेनस्ट्रीम में आने में कुछ समय है। 5जी के रोलआउट से पहले यूजर्स को 5जी तकनीक के बारे में जानना बेहद आवश्यक है। कई यूजर्स यह जानने के इच्छुक होंगे की क्या 5जी तकनीक उनकी उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी या नहीं। जैसे-जैसे मोबाइल डेटा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, हम निकट भविष्य में 5 जी जैसी अधिक तेज तकनीक की उम्मीद कर रहे हैं। कई कंपनियां इस तकनीक को विकसित करने के लिए काम कर रही हैं ताकि 5G हमारे भविष्य के नेटिज़न्स की जरूरतों को पूरा कर सके। स्मार्टफोन्स और स्मार्ट डिवाइस के मद्देनजर 5जी तकनीक में क्या फायदे और क्या नुकसान होंगे इसकी जानकारी हम इस पोस्ट में दे रहे हैं।5G टेक्नोलॉजी आने से दुनिया काफी बदलने वाला है लेकिन इसकी अपनी चुनौतियां भी हैं

 1G पहली पीढ़ी को संदर्भित करता है जिसे 1990 के दशक की शुरुआत में अपनाया गया था।
 2G दूसरी पीढ़ी को संदर्भित करता है, जिसने एनालॉग 1 जी को पूरी तरह से डिजिटल 2 जी नेटवर्क से बदल दिया। 2 जी नेटवर्क ने सबसे पहले एसएमएस (टेक्स्ट) की शुरुआत की संदेश), MMS (मल्टीमीडिया संदेश)                                                                                                                       3G तीसरी पीढ़ी को संदर्भित करता है जिसने संचार की गति को बढ़ाया और यह वीडियो कॉलिंग, लाइव स्ट्रीमिंग, मोबाइल इंटरनेट जैसी नई चीजों को करने में सक्षम था ।                                                                                                                                                                                            .     4G, 3G का उत्तराधिकारी है, 4G, 3G की तुलना में लगभग 5 से 7 गुना तेज है। यह 100 एमबीपीएस से 1 जीबीपीएस तक की गति प्रदान करता है।

5G कैसे काम करता है (How 5G Works)
5G टेक्नोलॉजी का आधार पांच तकनीकों से बनता है
1. मिलीमीटर वेव
2. छोटे सेल्स
3. मैक्सिमम MIMO
4. बीमफॉर्मिंग
5. फुल डुप्लेक्स

5G टेक्नोलॉजी के पांच आधार
5G तकनीक “सब-6 बैंड” में काम करने में सक्षम है, जिसकी फ्रीक्वेंसी आम तौर पर 3Ghz-6Ghz के बीच होती है. अधिकतर मौजूदा डिवाइस जैसे मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप भी इसी फ्रीक्वेंसी में काम करते हैं, जिसकी रीच काफी अधिक होती है.5G मोबाइल नेटवर्क का पांचवा जेनरेशन है. 5G को इस तरह से सोचिए कि 4G नेटवर्क की स्पीड का 100 गुना. 4G की तरह ही, 5G भी उसी मोबाइल नेटवर्किंग प्रिंसिपल पर आधारित है. पांचवी पीढ़ी की वायरलेस तकनीक अल्ट्रा लो लेटेन्सी (आपके फोन और टावर के बीच सिग्नल की स्पीड) और मल्टी-जीबीपीएस डेटा स्पीड पहुंचाने में सक्षम है.मिलीमीटर तरंगे ( Millimeter Waves )मिलीमीटर तरंगें विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का क्षेत्र है जहाँ तरंगदैर्घ्य 10 मिलीमीटर (0.4 इंच) से 1 मिलीमीटर (0.04 इंच) तक होता हैमिलीमीटर तरंगें इंफ्रारेड तरंगों या एक्स-रे से लंबी होती हैं, लेकिन माइक्रोवेव या रेडियो तरंगों से कम होती हैं। मिलीमीटर तरंगों को अत्यधिक उच्च आवृत्ति (EHF) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि रेडियो आवृत्ति का बैंड विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में 30 से 300 गीगाहर्ट्ज़ (GHz) के बीच होता है। इस बैंड में रेडियो तरंगों में 10 से 1 मिलीमीटर तक की तरंग दैर्ध्य होती है यही कारण है कि इसे मिलीमीटर बैंड कहा जाता है। मिलीमीटर तरंगों का एक नुकसान यह है कि वे बहुत लंबी दूरी की यात्रा नहीं कर सकते हैं क्योंकि आम तौर पर वे वायुमंडल में गैसों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।मिलीमीटर तरंगें बिंदु A से बिंदु B तक सीधी रेखाओं में यात्रा करती हैं, जिसका अर्थ है कि बीच में कोई हस्तक्षेप संचरण को अवरुद्ध कर सकता है। यहां तक ​​कि एक जानवर भी और बिंदु A और बिंदु B के बीच चलने वाला मानव संचरण को अवरुद्ध कर सकता है।

अब बात करते हैं इसके नुकसान की..

5G टेक्नोलॉजी के नुकसान..
इस नेटवर्क को लेकर जितने फायदे हैं उतने ही नुकसान ( 5G network Challenges) भी हैं। टेक्निकल युनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन, ईटीएच ज्यूरिक और नॉरवे के सिनटेफ डिजिटल द्वारा जारी किए गए एक रिसर्च पेपर में 5G नेटवर्क पर यूजर्स की प्रिवेसी को लेकर चिंता जताई गई है। रिसर्चर्स की माने तो 5G नेटवर्क के आने के बाद हैकर्स यूजर्स के डेटा को आसानी से हैक कर सकते हैं। वहीं, हाल में ही नीदरलैंड के हेग शहर में 5G नेटवर्क के टेस्टिंग के दौरान अचानक लगभग 297 पक्षियों की जान चली गई थी। 5G नेटवर्क की इस कमी को दूर करने के लिए रिसर्चर्स लगातार काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस सर्विस के चालू होने से पहले इस परेशानी को दूर कर लिया जाए। आपको बता दें 5G को Mobile Internet की पांचवीं पीढ़ी माना जा रहा है। अभी बाज़ार में 4G नेटवर्क का बोलबाला है लेकिन 5G नेटवर्क के आने के बाद बड़े से बड़े डेटा को आसानी से अपलोड किया जा सकेगा।

अब बात करते हैं इसके फायदे की..

5G टेक्नोलॉजी के फायदे..
जरा सोचिए कि आपने एक फुल एचडी फिल्म 3 सेकंड के अंदर डाउनलोड कर लिया. इतना ही तेज होने वाला है 5G नेटवर्क. क्वॉलकॉम के अनुसार, 5G ट्रैफिक कपैसिटी और नेटवर्क एफिसिएंसी में 20 जीबी प्रति सेकेंड की स्पीड देने में सक्षम है.इसके अलावा mm वेव के साथ, आप 1ms की लेटेंसी पा सकते हैं जो तुरंत कनेक्शन इस्टैब्लिश करने और नेटवर्क ट्रैफिक को कम करने में मदद करता है.क्वॉलकॉम के अध्यक्ष क्रिस्टियानो आमोन का भी मानना है कि 5G नेटवर्क ऐसी स्पीड देगा, जो रियल टाइम में ऑग्मेंटेड रियलटी का अनुभव करा सकता है. इससे ऑग्मेंटेड रियलिटी पर काम करने वाले हार्डवेयर के विकास में भी मदद मिलेगी.

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