पीएम मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात इस पत्थर को हटाने के लिए सात हाथियों का लिया गया सहारा, पर नहीं हिला

पीएम मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात इस पत्थर को हटाने के लिए सात हाथियों का लिया गया सहारा, पर नहीं हिला

(Tamilnadu) के शहर महाबलीपुरम  में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी  की मुलाकात हुई. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महाबलीपुरम के कई दर्शनीय स्थलों में लेकर गए. पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को महाबलीपुरम की दक्षिण भारतीय संस्कृति और इसकी समृद्ध विरासत के बारे में बताया. दोनों नेताओं के मुलाकात की एक तस्वीर काफी वायरल हो रही है.इस तस्वीर में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बड़े से पत्थर के आगे दिखाई दे रहे हैं. विशालकाय पत्थर के आगे दोनों नेता अपने हाथ ऊपर कर खड़े हैं. ये विशालकाय पत्थर बहुत ही छोटे से एरिया पर टिका है और खतरनाक रूप से आगे की तरफ झुका है. ऐसा लगता है कि ये पत्थर थोड़ी सी हलचल से कभी भी आगे की तरफ लुढ़क सकता है. लेकिन कहा जाता है कि पिछले 1300 साल से ये पत्थर यहां ऐसे ही पड़ा है.हमारी धरती पर अनेक अजूबों और रहस्यमयी तथ्यों का भण्डार है , जिनके बारे में कभी हम किताबों में पढ़ते हैं, तो कभी किसी की जुबानी सुनते हैं. सच में इन अद्भुत वस्तुओं और स्थानों के अस्तित्व पर संदेह होता है. ऐसा ही एक अजूबा है ‘कृष्णा की बटर बॉल’ के नाम से प्रसिद्द एक विशालकाय पत्थर जो दक्षिणी भारत में चेन्नई के एक कस्बे में महाबलीपुरम के किनारे स्तिथ है. रहस्यमयी पत्थर का यह विशाल गोला एक ढलान वाली पहाड़ी पर, 45 डिग्री के कोण पर बिना लुढ़के टिका हुआ है. यह पत्थर कृष्णा की बटर बॉल के नाम से फेमस है. माना जाता है यह कृष्ण के प्रिय भोजन मक्खन का प्रतीक है जो स्वयं स्वर्ग से गिरा है.

story of mahabalipuram krishna butter ball infront of which pm modi and xi jinping taken photo

– कृष्णा की बटर बॉल के नाम से मशहूर ये विशालकाय पत्थर दक्षिणी भारत में चेन्नई के एक कस्बे में महाबलीपुरम के किनारे स्थित है।
– रहस्यमयी पत्थर का ये विशाल गोला एक ढलान वाली पहाड़ी पर 45 डिग्री के कोण पर बिना लुढ़के टिका हुआ है।
– माना जाता है यह कृष्ण के प्रिय भोजन मक्खन का प्रतीक है, जो स्वयं स्वर्ग से गिरा है।

ग्रेविटी के िनयमों के विरुद्ध है ये पत्थर
– यह पत्थर आकार में 20 फीट ऊंचा और 5 मीटर चौड़ा है। जिसका वजन लगभग 250 टन है।
– अपने विशाल आकार के बावजूद कृष्णा की यह बटर बॉल फिजिक्स के ग्रेविटी के नियमों के विरुद्ध है।
– ये भारीभरकम पत्थर पहाड़ी की 4 फीट की सतह पर अनेक शताब्दियों से एक जगह पर टिका हुआ है।
– देखने वालों को महसूस होता है कि यह पत्थर किसी भी क्षण गिरकर इस पहाड़ी को चकनाचूर कर देगा।
– जबकि पत्थर का अस्तित्व आज तक एक रहस्य बना हुआ है। साइंटिस्ट्स इस पर कई लॉजिक देते हैं। लेकिन ठोस जवाब नहीं मिला।

कैसे टिका है इतना विशालकाय पत्थर?
इस विशालकाय पत्थर का यूं छोटे से स्थान पर टिके रहना अचंभित करने वाला है. इसी अचंभे को चीनी राष्ट्रपति को दिखाने प्रधानमंत्री मोदी उन्हें वहां लेकर गए थे. इसके आगे दोनों ने फोटो भी खिंचवाई और अब ये फोटो वायरल है. सोशल मीडिया पर इस फोटो को खूब शेयर किया जा रहा है. महाबलीपुरम का ये अचंभित कर देने वाला विशालकाय पत्थर लोगों के बीच चर्चा में बना हुआ है. इस पत्थर की कहानी दिलचस्प है.
महाबलीपुरम के एक पहाड़ी इलाके के उपरी भाग में टिके इस पत्थर को यहां के लोग कृष्णा बटर बॉल के नाम से जानते हैं. दिखने से ऐसा लगता है कि थोड़े से कंपन से ये विशालकाय पत्थर कभी भी पहाड़ से फिसल सकता है. लेकिन ये पत्थर पिछले 1300 साल से यहां ऐसे ही पड़ा है. कई बार इसके खतरनाक स्तर पर आगे की तरफ से झुके होने की वजह से इसे यहां से हटाने की कोशिश की गई लेकिन किसी को इसमें कामयाबी नहीं मिली.

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7 हाथी मिलकर भी पत्थर को हटा नहीं पाए
1908 में मद्रास के गवर्नर आर्थर लावले ने इस पत्थर को यहां से हटवाने की कोशिश की. अंग्रेज सरकार को लगता था कि हल्की सी हलचल से भी ये पत्थर लुढ़कर सामने के गांव पर गिर सकता है. ऐसी स्थिति में जानमाल का नुकसान होता. इससे बचने के लिए अंग्रेज सरकार ने इसे यहां से हटाने का प्रयास किया.

पल्लव राजा ने भी की थी नाकाम कोशिश
स्थानीय लोग इसको भगवान का चमत्कार मानते हैं। दक्षिण भारत में राज करने वाले पल्लव वंश के राजा ने इस पत्थर को हटाने का प्रयास किया, लेकिन कई कोशिशों के बाद उनके शक्तिशाली लोग इसको खिसकाने में भी सफल नहीं हुए। 1908 में मद्रास के गवर्नर आर्थर ने इसको हटाने का आदेश दिया, जिसके लिए सात हाथियों को काम पर लगाया गया था। आज ये टूरिस्ट आकर्षण बन चुका है, जहां हजारों लोग हर साल इसको देखने आते है, जिनमें से कुछ इसको धकेलने का प्रयास भी करते हैं निश्चित ही वो सफल नहीं होते।

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